AIB का आल इंडिया बकचोद शो आज बहस का एक गरमा गर्म मुद्दा बना हुआ है। एक और इसको सही ठहराने वाले समर्थको की जमात है तो दूसरी और इसके विरोधियों का समूह। समर्थक इसकी अश्लील विषयवस्तु को बोलने की आजादी का हवाला देते हुए सही ठहराने की कोशिश कर रहे है वही विरोधी ऐसे सीधा सीधा भारतीय मूल्यों पर कुठाराघात मान रहे है। आईये पाहिले समझते हैं ये विवाद है क्या ।
AIB एक रोस्ट शो है जिसे dec-2014 मैं मुम्बई के एक स्टेडियम मे आयोजित किया गया जिसमे लगभग 4000 लोग मौजूद थे बॉलीवुड की जानीमानी हस्तियों के साथ। रोस्टर की भूमिका मैं करण जौहर अर्जुन कपूर और रणवीर सिंह थे। इस शो में हास्य के नाम पर इस तरह की गन्दी भाषा का प्रयोग किया गया क़ि मर्यादा की सारी हदें तोड़ दी गयी। यही मुख्यता बहस का मुद्दा है। अश्लील फब्तियां कसने में महिलाओं को भी नहीं छोड़ा गया और शब्दावली कुछ ऐसी थी की चाह कर भी कुछ बानगी नहीं लिख पा रहा।
वस्तुतः रोस्ट एक ऐसा शो जिसमे एक guest को बुलाया जाता है और उस पर अन्य श्रोताओ की उपस्तिथि में व्यंग्य किये जाते है। यहाँ व्यंग्य का अर्थ अश्लील मजाक से है जिसमे उसकी माँ और बहन को भी नहीं छोड़ा जाता। इसमें रोस्टर guest होता है और संचालक रोस्ट मास्टर कहलाते है। अंत मैं गेस्ट का सम्मान किया जाता है। यह एक तरह से insult comedy है जो बहुत ही अश्लील होती है। इस तरह के ग्रुप में यह सम्मान देने का तरीका है।
रोस्ट की शुरुआत एक परुम्परा के रूप में न्यूयॉर्क के फरारी क्लब मैं हुई थी लगभग 1920 में और इसने लोकप्रियता पायी 60 और 70 के दशक मे।
AIB रोस्ट भी अमेरिका के comedy central तर्ज पर बना रोस्ट ग्रुप है। इसके पहले ही शो इतना गन्दा रहा क़ि इसके खिलाफ जंग छिड़ गयी। AIB national shame ट्वीटर ग्रुप इसका उदहारण है। मजे की बात यह है कि इस् शो का nature जानते हुए भी लगभग 4000 rs का टिकिट ख़रीद कर बड़ी संख्या मे श्रोता उपस्थित थे। जिनमे महिलाओ की भी बड़ी संख्या थी। सोनाक्षी सिन्हा दीपका पादुकोण आलिया भट्ट कुछ उदहारण है जिन्होंने न सिर्फ शो को बहुत अच्छा बताया बल्कि सपोर्ट भी किया।
इस शो को किसी टीवी नेटवर्क पर प्रसारित नहीं किया गया वरन एक adult वार्निंग डाल कर yutube पर और ABI की आधिकारिक वेबसाइट पर डाल दिया गया और वेब एपिसोड नाम दिया गया। इसे सिर्फ 7 दिन मैं 8 लाख लोगो ने देखा और और इसके क्लिप्स सोशल मीडिया पर virul हो गए।
अब सवाल उठता है कि यह तो सच है क़ि शो निहायत ही अश्लील था पर किस आधार पर आप इन लोगो को गलत ठहरा सकते हो।
AIB टीम ने इसे किसी टीवी नेटवर्क पर इसे प्रसारित नहीं किया। web पर भी एडल्ट वार्निंग के साथ डाला गया। अब सिर्फ दो तरह के लोग जिम्मेदार हुए पहले वो जो जानते बूझते हुये भी 4000 का टिकिट ख़रीद कर इसे देखने गए और दूसरे वो जिन लोगो ने इंटरनेट पर इसके लिंक पर क्लिक किया। इसकी डाउनलोड की संख्या भी इस बात का प्रमाण है क़ि इस तरह के शो की कितनी डिमांड है हमारे समाज में जहाँ 65 % आबादी युवा है। और फिर हम आम बोलचाल की भाषा में भी तो गालीगलौच का इस्तेमाल करते ही हैं तो फिर बहस क्यों । इंटरनेट पर तो तमाम तरह की अच्छी और गन्दी चीजे उप्लब्ध है तो इस पर हंगामा क्यों ,अगर आप नहीं देखना चाहते तो कोई आपको मजबूर तो कर नहीं रहा।
दिल की बात:
तमाम तरह के तर्क देने के बाद भी इस तरह की चीजो को दिल से सही नहीं ठहराया जा सकता। हास्य एक बहुत ही कठिन कला है और बरसो लग जाते हैं इसमें माहिर होने में। जल्दी लोकप्रियता पाने का आसान तरीका का लोगो की insult करना और हँसन। हास और उपहास में बहुत फर्क होता है। यूटुब पर पर शो के क्लिप डालना और फिर पुनः वापिस ले लेना वास्तव मे जनता रुख जानने का प्रयास ही था। इन लोगो को मालूम था कि इससे एक नयी बहस की शुरुआत होगी और हवा का रुख पता लग जायेगा। अगली बार फिर से ऐसा दोहराया जायेगा और धीरे धीरे सब सामान्य हो जायेगा और ऐसा होता भी आया है। आपको याद होगा केंटुकी फ्राइड चिकन का शुरू शुरू में कितना विरोध हुआ था और आज सब व्यवहारिक है। यह गलत इसलिए है कि आपको कोई अधिकार नहीं है कि आप सिर्फ हास्य के नाम पर समाज, धर्म और जीवन मूल्यों पर हमला करे और विरोध होने पर यूटुब से एपिसोड वापिस ले कर कर्त्तव्य की एतिश्री कर लें। जो क्षति हो चुकी है वो तो हमेशा अपूर्णीय है ही। इस तरह के शो मे जानीमानी हस्तियों की उपस्तिथि निन्दनीय है ऐसा करने का उद्देश्य इस तरह के शो को जनता तक पहुँचाना ही है। इन हस्तियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। हाई स्पीड इंटरनेट के चलते हुए आने वाले दिनों में इस तरह की और भी चीजे आपके सामने आएँगी और आप बेबस होंगे।
जल्द मिलेंगे नए सब्जेक्ट के साथ
योगेश
AIB एक रोस्ट शो है जिसे dec-2014 मैं मुम्बई के एक स्टेडियम मे आयोजित किया गया जिसमे लगभग 4000 लोग मौजूद थे बॉलीवुड की जानीमानी हस्तियों के साथ। रोस्टर की भूमिका मैं करण जौहर अर्जुन कपूर और रणवीर सिंह थे। इस शो में हास्य के नाम पर इस तरह की गन्दी भाषा का प्रयोग किया गया क़ि मर्यादा की सारी हदें तोड़ दी गयी। यही मुख्यता बहस का मुद्दा है। अश्लील फब्तियां कसने में महिलाओं को भी नहीं छोड़ा गया और शब्दावली कुछ ऐसी थी की चाह कर भी कुछ बानगी नहीं लिख पा रहा।
वस्तुतः रोस्ट एक ऐसा शो जिसमे एक guest को बुलाया जाता है और उस पर अन्य श्रोताओ की उपस्तिथि में व्यंग्य किये जाते है। यहाँ व्यंग्य का अर्थ अश्लील मजाक से है जिसमे उसकी माँ और बहन को भी नहीं छोड़ा जाता। इसमें रोस्टर guest होता है और संचालक रोस्ट मास्टर कहलाते है। अंत मैं गेस्ट का सम्मान किया जाता है। यह एक तरह से insult comedy है जो बहुत ही अश्लील होती है। इस तरह के ग्रुप में यह सम्मान देने का तरीका है।
रोस्ट की शुरुआत एक परुम्परा के रूप में न्यूयॉर्क के फरारी क्लब मैं हुई थी लगभग 1920 में और इसने लोकप्रियता पायी 60 और 70 के दशक मे।
AIB रोस्ट भी अमेरिका के comedy central तर्ज पर बना रोस्ट ग्रुप है। इसके पहले ही शो इतना गन्दा रहा क़ि इसके खिलाफ जंग छिड़ गयी। AIB national shame ट्वीटर ग्रुप इसका उदहारण है। मजे की बात यह है कि इस् शो का nature जानते हुए भी लगभग 4000 rs का टिकिट ख़रीद कर बड़ी संख्या मे श्रोता उपस्थित थे। जिनमे महिलाओ की भी बड़ी संख्या थी। सोनाक्षी सिन्हा दीपका पादुकोण आलिया भट्ट कुछ उदहारण है जिन्होंने न सिर्फ शो को बहुत अच्छा बताया बल्कि सपोर्ट भी किया।
इस शो को किसी टीवी नेटवर्क पर प्रसारित नहीं किया गया वरन एक adult वार्निंग डाल कर yutube पर और ABI की आधिकारिक वेबसाइट पर डाल दिया गया और वेब एपिसोड नाम दिया गया। इसे सिर्फ 7 दिन मैं 8 लाख लोगो ने देखा और और इसके क्लिप्स सोशल मीडिया पर virul हो गए।
अब सवाल उठता है कि यह तो सच है क़ि शो निहायत ही अश्लील था पर किस आधार पर आप इन लोगो को गलत ठहरा सकते हो।
AIB टीम ने इसे किसी टीवी नेटवर्क पर इसे प्रसारित नहीं किया। web पर भी एडल्ट वार्निंग के साथ डाला गया। अब सिर्फ दो तरह के लोग जिम्मेदार हुए पहले वो जो जानते बूझते हुये भी 4000 का टिकिट ख़रीद कर इसे देखने गए और दूसरे वो जिन लोगो ने इंटरनेट पर इसके लिंक पर क्लिक किया। इसकी डाउनलोड की संख्या भी इस बात का प्रमाण है क़ि इस तरह के शो की कितनी डिमांड है हमारे समाज में जहाँ 65 % आबादी युवा है। और फिर हम आम बोलचाल की भाषा में भी तो गालीगलौच का इस्तेमाल करते ही हैं तो फिर बहस क्यों । इंटरनेट पर तो तमाम तरह की अच्छी और गन्दी चीजे उप्लब्ध है तो इस पर हंगामा क्यों ,अगर आप नहीं देखना चाहते तो कोई आपको मजबूर तो कर नहीं रहा।
दिल की बात:
तमाम तरह के तर्क देने के बाद भी इस तरह की चीजो को दिल से सही नहीं ठहराया जा सकता। हास्य एक बहुत ही कठिन कला है और बरसो लग जाते हैं इसमें माहिर होने में। जल्दी लोकप्रियता पाने का आसान तरीका का लोगो की insult करना और हँसन। हास और उपहास में बहुत फर्क होता है। यूटुब पर पर शो के क्लिप डालना और फिर पुनः वापिस ले लेना वास्तव मे जनता रुख जानने का प्रयास ही था। इन लोगो को मालूम था कि इससे एक नयी बहस की शुरुआत होगी और हवा का रुख पता लग जायेगा। अगली बार फिर से ऐसा दोहराया जायेगा और धीरे धीरे सब सामान्य हो जायेगा और ऐसा होता भी आया है। आपको याद होगा केंटुकी फ्राइड चिकन का शुरू शुरू में कितना विरोध हुआ था और आज सब व्यवहारिक है। यह गलत इसलिए है कि आपको कोई अधिकार नहीं है कि आप सिर्फ हास्य के नाम पर समाज, धर्म और जीवन मूल्यों पर हमला करे और विरोध होने पर यूटुब से एपिसोड वापिस ले कर कर्त्तव्य की एतिश्री कर लें। जो क्षति हो चुकी है वो तो हमेशा अपूर्णीय है ही। इस तरह के शो मे जानीमानी हस्तियों की उपस्तिथि निन्दनीय है ऐसा करने का उद्देश्य इस तरह के शो को जनता तक पहुँचाना ही है। इन हस्तियों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। हाई स्पीड इंटरनेट के चलते हुए आने वाले दिनों में इस तरह की और भी चीजे आपके सामने आएँगी और आप बेबस होंगे।
जल्द मिलेंगे नए सब्जेक्ट के साथ
योगेश
👍
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