केजरीवाल की प्रचंड जीत के बाद सवाल उठता है क़ि काँग्रेस की हार तो पक्की थी पर भाजपा के साथ ऐसा क्या हुआ।
एक प्रबुद्ध नागरिक दिनेश जी का कहना है।
ये केजरीवाल की जीत नही।
मोदी के विरोधियो की सामूहिक जीत है।जिसमे मिडिया से लेकर देश के सभी धुरंधर शामिल है।
मुसलमानो का पूरा वोट बिना बटे आप को मिला
ना है ये केजरीवाल की जीत नही।
मोदी के विरोधियो की सामूहिक जीत है।जिसमे मिडिया से लेकर देश के सभी धुरंधर शामिल है।
मुसलमानो का पूरा वोट बिना बटे आप को मिला
पर मदन चतुर्वेदी के अनुसार क्या यह सत्य नहीं है
आप को मुसलमानो ने मिलकर बोट दिया ये तो वहां दीवार पर लिखा दिख रहा था पर हिंदुओं ने क्यू नहीं दिया और ये क्या बी जे पी की हार है क्या ये हार नहीं है ये तो कुचला है जिसके नीचे कुछ नहीं बचा और जब तक दिल्ली रहेगी ये एक रिकार्ड रहेगा 70 मे 67 सीट
अकल्पनीय
मोदी हरयाणा मे गुजरात और हरियाणा मे क़त्ल खाने की फ़ाइल पर जब साइन कर रहे थे तब केजरीवाल घर घर ये भरोसा दे रहा था की नीच और भ्रष्ट पुलिश से हम आपको सुरछा देंगे
दिल्ली की संपूर्ण भाजपा ने हारने के लिए चुनाव लड़ा। पिछली बार की तरह 500-1000 वोटों से नहीं, बल्कि 10 हजार से लेकर 50 हजार वोटों के अंतर से हारे हैं भाजपाई...
देश के भावनाप्रबल राष्ट्रवादी लोगों को क्या मोदीजी जुमले के तौर पर सब्जबाग दिखाते रहे,वैसे भी उनका हिंदुत्व के मुद्दे से कन्नी काटना,धारा ३७० पर धीमी कार्यवाही,राममंदिर सहित गौहत्या पाबन्दी इत्यादि मुद्दों पर यु टर्न ने लोगों को संदेह में दाल दिया था और देश के करोड़ों लोगों ने जहाँ रेल लाइन नहीं देखि उस देश में सिर्फ अहमदाबाद से मुंबई तक बुलेट ट्रैन चलाने के लिए जो ललक वे दिखाते रहे,जापान से लेकर चीन से लाखों करोड़ों के समझोता किया क्या उसकी भरपाई सिर्फ गुजरात और महाराष्ट्र के लोग करेंगे या पुरे देश के लोगों की जेब से ये उधार की ट्रैन का कर्जा चुकाया जाएगा ऐसे अनेक प्रश्न लोगों के जहन में चिंता और संदेह पैदा करते हैं!अंधभक्त लिखते हैं की मोदीजी २० घंटे काम करते हैं,ठीक है मानते हैं करते होंगे,यानी एक दिन में अढ़ाई दिन का काम वे कर रहे हैं,तो फिर उनको प्रधानमंत्री बने ९ महीने हो गए यानि ओरों के लिए २७ महीने हो गए,तो फिर कहाँ है,कुछ दिख रहा है लोगों को २७ महीने जैसा काम?हर मामले में अभी तक तो मोदीजी और अमित शाहजी फेल होते नजर आ रहे हैं,सिर्फ चुनाव,सत्ता,और सदस्यता अभियान सहित स्वछभारत अभियान भी नौटंकी सी लग रही है लोगों को!मनमोहन सिंह के समय बॉर्डर पर ऐसा क्या होता था जो अब नहीं हो रहा,इसके साथ ही अभी जो न्यूक्लियर डील में भी अमरीकी सरतों पर सहमति हुवी और अमरीका पहुंचते ही मोदीजी के देश पर ही अंगुली उठा दी,जबकि ओबामा की जवांई जैसी खातिर हुवी थी!दोस्तों कॉंग्रेस्स शासन में तो फिर भी ये साधु संत और साध्वी खुल कर हिंदुत्व पर भाषण मार देते थे,किन्तु अब जिनको हम हिन्दुओं का शेर बनाकर सत्ता दी है,उसके ही शासन में साधुसंत या साध्वी मुसलमानों का विरोध करने से,बच्चे पैदा करने की बात करने से बिकाऊ मिडिया के विवादित बयान बताते ही खुद भी माफ़ी मांग लेते हैं और साधुसन्तों एवं साध्वी से भी माफ़ी मंगवाते हैं!कुछ भी हो सत्ता पर बना रहना है और तहत बात से रहना है यही सन्देश तो अभी तक लोगों में गया है दोस्तों!
दिल की बात :
मोदी जी हमें आपसे बहुत उम्मीदे है आशा है क़ि आप इस पर विचार करेंगे। आप का जैसा नेता बहुत वर्षो बाद ही हमें मिलता है और हम चाहते है कि इससे पाहिले आपकी बुराई करना लोगो का शौक बन जाये कृपया कुछ कीजिये।
एक प्रबुद्ध नागरिक दिनेश जी का कहना है।
ये केजरीवाल की जीत नही।
मोदी के विरोधियो की सामूहिक जीत है।जिसमे मिडिया से लेकर देश के सभी धुरंधर शामिल है।
मुसलमानो का पूरा वोट बिना बटे आप को मिला
ना है ये केजरीवाल की जीत नही।
मोदी के विरोधियो की सामूहिक जीत है।जिसमे मिडिया से लेकर देश के सभी धुरंधर शामिल है।
मुसलमानो का पूरा वोट बिना बटे आप को मिला
पर मदन चतुर्वेदी के अनुसार क्या यह सत्य नहीं है
आप को मुसलमानो ने मिलकर बोट दिया ये तो वहां दीवार पर लिखा दिख रहा था पर हिंदुओं ने क्यू नहीं दिया और ये क्या बी जे पी की हार है क्या ये हार नहीं है ये तो कुचला है जिसके नीचे कुछ नहीं बचा और जब तक दिल्ली रहेगी ये एक रिकार्ड रहेगा 70 मे 67 सीट
अकल्पनीय
मोदी हरयाणा मे गुजरात और हरियाणा मे क़त्ल खाने की फ़ाइल पर जब साइन कर रहे थे तब केजरीवाल घर घर ये भरोसा दे रहा था की नीच और भ्रष्ट पुलिश से हम आपको सुरछा देंगे
दिल्ली की संपूर्ण भाजपा ने हारने के लिए चुनाव लड़ा। पिछली बार की तरह 500-1000 वोटों से नहीं, बल्कि 10 हजार से लेकर 50 हजार वोटों के अंतर से हारे हैं भाजपाई...
देश के भावनाप्रबल राष्ट्रवादी लोगों को क्या मोदीजी जुमले के तौर पर सब्जबाग दिखाते रहे,वैसे भी उनका हिंदुत्व के मुद्दे से कन्नी काटना,धारा ३७० पर धीमी कार्यवाही,राममंदिर सहित गौहत्या पाबन्दी इत्यादि मुद्दों पर यु टर्न ने लोगों को संदेह में दाल दिया था और देश के करोड़ों लोगों ने जहाँ रेल लाइन नहीं देखि उस देश में सिर्फ अहमदाबाद से मुंबई तक बुलेट ट्रैन चलाने के लिए जो ललक वे दिखाते रहे,जापान से लेकर चीन से लाखों करोड़ों के समझोता किया क्या उसकी भरपाई सिर्फ गुजरात और महाराष्ट्र के लोग करेंगे या पुरे देश के लोगों की जेब से ये उधार की ट्रैन का कर्जा चुकाया जाएगा ऐसे अनेक प्रश्न लोगों के जहन में चिंता और संदेह पैदा करते हैं!अंधभक्त लिखते हैं की मोदीजी २० घंटे काम करते हैं,ठीक है मानते हैं करते होंगे,यानी एक दिन में अढ़ाई दिन का काम वे कर रहे हैं,तो फिर उनको प्रधानमंत्री बने ९ महीने हो गए यानि ओरों के लिए २७ महीने हो गए,तो फिर कहाँ है,कुछ दिख रहा है लोगों को २७ महीने जैसा काम?हर मामले में अभी तक तो मोदीजी और अमित शाहजी फेल होते नजर आ रहे हैं,सिर्फ चुनाव,सत्ता,और सदस्यता अभियान सहित स्वछभारत अभियान भी नौटंकी सी लग रही है लोगों को!मनमोहन सिंह के समय बॉर्डर पर ऐसा क्या होता था जो अब नहीं हो रहा,इसके साथ ही अभी जो न्यूक्लियर डील में भी अमरीकी सरतों पर सहमति हुवी और अमरीका पहुंचते ही मोदीजी के देश पर ही अंगुली उठा दी,जबकि ओबामा की जवांई जैसी खातिर हुवी थी!दोस्तों कॉंग्रेस्स शासन में तो फिर भी ये साधु संत और साध्वी खुल कर हिंदुत्व पर भाषण मार देते थे,किन्तु अब जिनको हम हिन्दुओं का शेर बनाकर सत्ता दी है,उसके ही शासन में साधुसंत या साध्वी मुसलमानों का विरोध करने से,बच्चे पैदा करने की बात करने से बिकाऊ मिडिया के विवादित बयान बताते ही खुद भी माफ़ी मांग लेते हैं और साधुसन्तों एवं साध्वी से भी माफ़ी मंगवाते हैं!कुछ भी हो सत्ता पर बना रहना है और तहत बात से रहना है यही सन्देश तो अभी तक लोगों में गया है दोस्तों!
दिल की बात :
मोदी जी हमें आपसे बहुत उम्मीदे है आशा है क़ि आप इस पर विचार करेंगे। आप का जैसा नेता बहुत वर्षो बाद ही हमें मिलता है और हम चाहते है कि इससे पाहिले आपकी बुराई करना लोगो का शौक बन जाये कृपया कुछ कीजिये।
"इससे पाहिले आपकी बुराई करना लोगो का शौक बन जाये कृपया कुछ कीजिये।"
ReplyDeleteबहुत खूब गुरुजी
वाह कया लिखा है
ReplyDelete